किस्मत
कविता
कितना भी पढ़ लो हाथों में, लिखी वही तहरीर।
कोशिश करलो वही मिलेगा, जो लिखा है लकीर।।
अच्छे घर में रिश्ता हो गया, पढ़ा-लिखा परिवार।
बेटी किस्मत बहुत भली है, प्राणी हैं कुल चार।।
शादी मंडप सजा हुआ है, चारों ओर बहार।
शहनाई धुन कर्ण में गूँजे, होते मंगल चार।।
समय हो गया है फेरों का, दुल्हन है तैयार।
दूल्हा-दुल्हन फेरे ले रहे, खुशियों की बौछार।।
शादी की सब रस्में हो गईं, रहे विदा में देर।
आस-पास का देख नजारा, दी दूल्हे को टेर।।
दूल्हे के सब साथी आए, इधर-उधर से घूम।
सामने एक ताल दिख गया, रहे खुशी में झूम।।
विचार नहाने का बनाया, गए ताल में कूद।
गहरे पानी दूल्हा आया, आँख दंभ से मूंद।।
यारों का भी ध्यान नहीं था, रहे मस्ती में चूर।
चींख सुनाई दी दूल्हे की, डूब रहा था दूर।।
उसे बचाने की कोशिश की, पहुँच न पाए पास।
लोग बहुत से दौड़े आए, कूदे बचाव आस।।
घराती बाराती आ गए, सबकी निकले जान।
अफरा तफरी देर हो गई, बच ना पाए प्रान।।
बस्ती हा-हाकार मच गया, दुल्हन हुई बेहोश।
दुल्हन पिता जमीन पड़े हैं, खोए अपने होश।।
लेकर आई किस्मत कैसी, क्या लिखा है नसीब।
माँ-बाप को सभी संभालें, बेटी पड़ी करीब।।
होश आ गया बेटी को तो, गई ताल पर भाग।
पीछे लोग दौड़ते आए, रुकजा-रुकजा जाग।।
कोई पकड़ न पाया उसको, छलांग लगी छपाक।
एक युवक पीछे से कूदा, देखें सभी अवाक।।
वह दूल्हे का छोटा भाई, बाहर ताल निकाल।
दुल्हन धीरज रखना होगा, मत अपनाओ काल।।
दूल्हे पिता होश में आए, करते सोच विचार।
दाह-संस्कार कर बेटे का, मन की सुनी पुकार।।
बहू भी बेटी हो गई है, कैसे मिटता रोष।।
होनी कोई कैसे टाले, क्या बेटी का दोष।
सोच-समझ कर निश्चय कर लिया, लिया फैसला ठोस।।
छोटे बेटे को बुलवाया, बोले बहू निर्दोष।।
शादी तुम्हें बहू से करनी, निर्णय दिया बताय।
सवाली निगाह देखती है, सुनना चाहे राय।।
देख पिता की उलझन बेटा, बात गया है मान।।
हाँ करदी उसने शादी की, हुई जान में जान।।
समधी को ये खबर सुनाई, फैली खुशी अपार।
पन्द्रह दिन में शादी हो गई, पिछला नहीं बिसार।।
वाह-वाह सब ही करते हैं, सज्जनता की मिसाल।
दुल्हन को डर लगा हुआ है, क्या होगा ससुराल।।
किस-किस के ताने सुनने हैं, कौन मुझे अपनाय।
कौन भूलता बड़े पूत को, मैं मनहूस कहाय।।
मेरी किस्मत में ही लिख दी, कैसी किस्मत मार।
धीरे-धीरे सब सुधरेगा, बुरा दिन "श्री" बिसार।।
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सुन्दर
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