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Ektarfa Pyaar

 
Hindi poem

 एकतरफा प्यार

दुनिया मे लाखों चेहरे, 

पर मैंने एक ही चेहरा पाया! 

  पर उसका नाम न था न पता,

 पर दिल मे एक शुकुन था,

 जो मन को मेरा भाया! 


अब तो हमे शाम, 

शाम ही नही लगती! 

  अंधेरी रातों मे, उजाला सा लगता है! 


ये हवाएं फूलों की खुशबु भी, उनके होने का एहसास दिला रही है! 

  एकांत बैठा ख्वाबों मे खोया,

 टपकती ओश् की बूँदे,

मानो आने वाले वर्षा का अनुमान लगा रही है! 



   उनकी एक झलक न मिलने से ही, 

उनकी जुदाई का डर सताने लगी है! 

   न पाने का, होने वाला शोर मेरे कानों मे गूंजने लगी है! 


  दिन बीती लम्हें आए लम्हें चले गए,

 पर ओ हमें कहीं मिली नही, 

अब उनकी आश न थी! 

    अब हमें ऐसा लगा कि खुली हवाओं में,

जिस तारे को हम एकटक निहारते रहे, 

ओ टूटकर कहीं जाके विलीन हो गयी थी! 


    ये हमारा पहला प्यार का पहला एहसास था, 

जो विक्षिप्त हो गयी विलीन हो गयी! 

    उनका एहसास जो सुंदर कांटो की तरह,

पूरी काया में चुभती थी अब ओ बेजान पत्थर सी हो गयी! 


*written by gajanand jayanti kenwat(gajju)*✍🏻

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Poet

Gajanand Jayanti Kenwat (gajju) 

EDUCATION :Maths, Bsc
ADDRESS :dhabhara, Janjgir, Champa, Chhattisgarh
Hindi poet



Publisher

Om Tripathi

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