रात की सुबह
(कविता )
इस रात की सुबह
कब होगी इस रात की सुबह।
कब मिलेगा रूहे सुकून हर जगह।
कोरोना महामारी से त्रस्त है सारी व्यवस्था।
बंद हो चुके हैं बच्चों की कॉपी और बस्ता।
कहीं कोई है भूखा और प्यासा।
कहीं ऑक्सीजन छीन रहा है सांसों की आशा।
चमन में चारों ओर छाई है उदासीनता।
मुरझाए फूल और हरियाली है खस्ता।
आतंक छाया है चारों ओर।
टूट रही है लोगों के जीवन की डोर।
चारों ओर हो रहा है त्राहिमाम त्राहिमाम।
जाने क्या होगा अब हमारा अंजाम।
कहीं कम है दवाइयां कहीं अस्पताल फुल।
क्या हो गई है मानवता से कुछ भूल।
पर इस रात की सुबह होगी जरूर।
यह बीमारी भी जाएगी हम सब से दूर।
बढ़ानी होगी हमें अपनी इच्छा शक्ति।
तभी होगी विजय और हमारी प्रशस्ति।
हाथों को धुलना होगा बार-बार।
घर में ही रहकर करना है प्रहार।
मास्क लगाएं और दूरी बनाए हम।
अभी रखना है सब्र व संयम।
अभी करनी है दूर से मुलाकात।
तभी भविष्य में रहेंगे हम साथ साथ।
पुनः मुस्कुराएंगे हम खिलेंगे फूल।
अब नहीं करनी है कोई भूल।
![]() |
| Designed by Yasho Dharm Yogesh Pandey |
हमसे जुडने के लिए👉यहाँ click करें👈
Publisher
Om Tripathi
आप भी अगर साहित्य उत्थान के इस प्रयास में अपनी मदद देना चाहते हैं तो UPI ID. 9302115955@paytm पर अपनी इच्छा अनुसार राशि प्रदान कर सकते हैं।
Social Media Manager
Shourya Paroha


टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
हमें बताएं आपको यह कविता कैसी लगी।