"ऐ जिदगीं जरा सा ठहर जा,
अभी बहुत कुछ करना बाकी है ।
बहुत लोगो की उम्मीद हूँ मैं,
उन्हें पूरा करना अभी बाकी है ।
बच्चों के लिये है जीना,
उनकी प्रेरणा बननी बाकी है।
कुछ लोगो को है औकात बताना,
उन्हें औकात में लाना बाकी है।
कुछ लोगों की नजरों को है झुकाना,
अपना कद बढाना अभी बाकी है।
ऐ जिंदगी जरा धीरे चल ,
अभी आसमान छुना बाकी है। "
Written by
Vartika dubey
Phulpur, Prayagraaj
Posted by
Om Tripathi

nice poem
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