हिंद प्रेम सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

हिंद प्रेम




मैं हिंद प्रेम का वासी हूँ, हाँ भारत मेरा अपना है॥ 
सब खुश रहैं , आपस में हाँ प्रेम करे बस इतना मेरा  सपना है॥ 
मैं हिंद प्रेम का वासी हूँ, हाँ आर्यवर्त मेरा अपना है॥         हिम्मत जिसमें अपार जो कभी न माने हार यही मेरा अपना है॥ मैं हिंद प्रेम का वासी हूँ, हाँ भारत मेरा अपना है॥ 
जहाँ कभी न होता दुराचार शिक्षा का हो पूरा अधिकार, बस यही मेरा अपनाहै है॥ 
मैं हिंद प्रेम का वासी हूँ, हाँ आर्यवर्त मेरा अपना है॥
हाँ भारत ही विश्व गुरु और अखंड बने, बस सपना मेरा इतना है॥ 
मैं हिंद प्रेम का वासी हूँ, हाँ भारत मेरा अपना है॥ 
यूवा बालकों को ही देखो, मन में देश प्रेम का सपना है॥ 
मैं हिंद प्रेम का वासी हूँ, हाँ आर्यवर्त मेरा अपना है॥
लगता है इस काबिल बन जाऊँ, अपनों का मैं साथ निभाऊ॥ 
मैं हिंद प्रेम का वासी हूँ, हाँ भारत मेरा अपना है॥ 
भारत माँ की रक्षा में, मैं सर्वश्य लुटा जाऊँ, बस सपना मेरा इतना है॥ 
मैं हिंद प्रेम का वासी हूँ, हाँ आर्यवर्त मेरा अपना है॥
मैं हिंद प्रेम का वासी हूँ, हाँ भारत मेरा अपना है॥

  Written by
 - Vedansh Pathak(Vedu)

 
  Posted by
Om Tripathi

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

हमें बताएं आपको यह कविता कैसी लगी।