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Jindagi

 _   आसान नही होती लड़को की जिंदगी अपने अंदर कितना दर्द छुपा कर रखते है. फिर भी कभी किसी से कुछ कहते नही है. हमने तो यूं ही उन्हे पत्थर समझ लिया।  ना जाने सबके लिए क्या कुछ नही किया।।  जितना हम सोचते उतनी आसान नहीं होती लड़को की जिंदगी उनके कंधो पर बचपन से डाल दी जाती है जिम्मेदारी।  पता नहीं कहाँ से आ जाती इनमे यह समझदारी।।  सब की ख्वाइश इनको करनी होती है पूरी।  क्योंकि इनके लिए वही है सबसे जरूरी।।  जितना हम सोचते उतनी आसान नहीं होती लड़को की जिंदगी मुश्किल है, इनकी तरह हर हाल मे शांत रहना।  अपने आँसुओ को आँखों मे ही रहने देना।।  फिर भी कभी किसी से कुछ न कहना।  इनकी आदत है यह सब कुछ सहना।।  जितना हम सोचते उतनी आसान नहीं होती लड़को की जिंदगी दिल मे हर दर्द को छुपाया है इन्होंने।  हर पल सबको हंसाया है इन्होंने।।  पता नही कितने दर्द दफना दिये। चेहरे पर हमारी मुस्कराहट के लिए।।  जितना हम सोचते उतनी आसान नहीं होती लड़को की जिंदगी लड़कियों के जाने पर तो जमाना रोता है।  इनके जाने से परिवार चैन की नींद सोता है...

Naree Shakti

 _  नारी  शक्ति  नारी  तू  शक्ति  है ,  श्रद्धा  सुमन  भक्ति  है  तू  गौरी  ,  तू  लक्ष्मी  ,  तू  सरस्वती  है || तू करुणा है,  तू ममता है,  तू जननी है,  तू माया है तू शक्तिस्वरुपिणी दुर्गा,  सत्यस्वरुपिणी राधा है || तू  भाव है, तू भावना है,  तू लज्जा है,  तू सज्जा है तू नंदिनी, तू कामिनी, तू सद्गुण वैभव शालिनी  है || तू  इत्र  है ,  तू  मित्र  है ,  तू  चित्र  है ,  तू  चरित्र  है तू  दृष्टि , तू  चेतना , तू  सृष्टि ,  तू  बंदना  है || मीरा  की  भक्ति  तुझमें ,  मां  अहिल्या  का  धैर्य  पद्मावती  सी  साहस  तुम  में,  लक्ष्मीबाई का शौर्य  तेरे  ज्ञान  से  है  जीवन  तेरे  कर्मो  से  है  पहचान ऋृणी रहेगी ये धरती तू है  हाड़ी  रानी  का बलिदा...

Tanha

_ मैं बेचारा तन्हा अकेला  मैं बेचारा तन्हा अकेला भीगी राहों पर ढूँढ रहा, खुद को, कहीं | सड़कें भीगीं, शहर धुंधला, आसमान में घना कोहरा | भीगे आँखों से छलके यादों की धार, हर बूँद में गूँजे तेरा प्यार। शहर की भीड़ में, मैं खुद से पूछता, अपनी परछाई से ही अब मैं रूठता। पत्थरों में चमक, पर दिल में अँधेरा, टूटे सपनों सा लगता जीवन | खोया है कुछ, या पाया सवेरा? मैं मुस्कुराता नहीं मगर, हार भी मानता नहीं | सपनों की राख से, गढ़ता कोई सितारा।  ~ बाल कृष्ण मिश्रा Address: Bal Krishna Mishra          Flat No. 253, Ground Floor, Shri Krishna Apartment, J-2, Sector: 16, Rohini: 110089, New Delhi.          

मातृभूमि

  _ मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम यह कविता मातृभूमि के प्रति गहरी श्रद्धा, प्रेम और गर्व को व्यक्त करती है। कवि बाल कृष्ण मिश्रा ने देश की संस्कृति, त्याग और पावन धरा का सुंदर चित्र प्रस्तुत किया है। उगता सूरज तिलक लगाता उज्जवल चंद्र किरण की वर्षा , नतमस्तक हूँ तेरे चरणों में तेरे चरणों में चारों धाम | मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम || तेरी माटी शीतल चंदन , जिसमें खेले खुद रघुनन्दन । जिसमें कान्हा ने जन्म लिया , कभी खाई , कभी लेप किया । सीता की मर्यादा यहाँ , यहाँ मीरा का प्रेम | मन के दर्पण का तू दर्शन तेरे आँचल में संस्कृति का मान। मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम || कल कल करती नदियां अपनी संगीत सुनाए। चू चू करती चिड़िया अपनी गीत सुनाए। मातृभूमि की पावन धरा , हर हृदय में प्रेम संजोए काशी विश्वनाथ की आरती, हर मन में दीप जलाए | आध्यात्म की गहराई यहाँ और विज्ञान की उड़ान | मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम || दिव्य अलौकिक अजर अमर कंकर भी बन जाता यहाँ शंकर | बलिदानों की गाथा तू , तू वीरों की पहचान | जय-जय माँ भारती, जय यह पवित्र धरा महान मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम || ~ बाल कृष्ण मिश्रा Addres...

Manavata

 _  मानवता 🙏🙏जय माँ सरस्वति🙏🙏 “यह कविता ‘मानवता’ हमारे समाज में बढ़ती ठिठुरन और दया-भाव के अभाव को व्यक्त करती है। खुशबू पांडे त्रिपाठी द्वारा लिखित यह हिंदी कविता विशेष रूप से शीत, कोहरा तथा मानवीय संवेदनाओं पर केंद्रित है।” ठिठुर रहा है सब, वन उपवन ठिठुरा रहा जग सारा । ठिठुर गई हैं सुन्दर कलियाँ, है ठिठुरा हुआ नजारा ।। ठिठुर गई है धरती अम्बर है, ठिठुरा हुआ उजियारा । ठिठुर गई हैं बहती नदियाँ, ठिठुरा हुआ किनारा ।। ठिठुर न ज़ाए पुलकित मानव दया का ह्रदय तुम्हारा । ठिठुर गई हैं गीली रातें हैं, ठिठुरा हुआ दिन बेचारा ।। टपक रहै हैं‌ ओश ऐसे,टपके जैसे मोती। घासों के झुरमुट में गुंथे गुंथी‌‌ हो‌ जैसे‌ चोटी।। धूल लपेटे वृक्ष खड़े हैं, लिपटी हों जैसे धोती। कोहरे की मुस्कान खिली है, नज़र बड़ी खोटी।। सूरज की किरणों को देखकर शर्दी खूब बड़ाए। रातों को यह ठंडे कोहरे फूले नहीं समाए।। ठिठुर रही है ,अब मानवता, प्रेम जगह न पाए। रोश ,क्रोध और निन्दा नफरत दिन प्रति पैर बड़ाए।। ~ खुशबु पांडे त्रिपाठी