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Poet Amrita Tripathi



हर रिश्ते का नाम नहीं होता है जिन्दगी में यैसे मोड़ आते हैं कि हर मोड़ का मुकाम नही होता ये समाज कहता है ये दुनियां है दिलवालो की लेकिन इसी दुनियां में कोई पत्थर दिल भी होता है
हमारी एक गलती के लिए बार बार रोकता है और अपनी एक गलती छुपाने के पीछे सौ झूठ बोलता है ये समाज
हमारी संस्कृति और सभ्यता इसी समाज से है लेकिन अपनी ही विरासत को भूल कर इतना आधुनिक क्यों बन रहा है समाज
समाज कहता है सफ़ाई अभियान करो और अपने ही दिल की गंदगी हटाता नही समाज हम सुधरेंगे जग सुधरेगा इसी कहावत के साथ आओ मिलकर समाज में सामाजिकता का फूल खिलाएं

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Poet

Amrita Tripathi

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Hindi poet




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Om Tripathi

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