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Kaner ke phool

_कनेर के फूल 

Poem written by Dr. Abha Maheshwari


मै जब भी कनेर को देखती हूँ

उसके श्वेत फूलों को निहारती हूँ

कई कल्पनाएँ मेरे मानसपटल पर

                 उतर आती हैं

लगता है कि कनेर की डाल कोई येगिनी है

सफेद साड़ी मेंअवगुंठित कर तन को

        योग साधे खड़ी है

तन साधे है

मन बाँधे है

सफेद फूलों के धागे से

लेकिन लगता है कि धागे कच्चे हैं

                टूट जायेंगे

उसके मन के मोती बिखर जायेंगे

किन्तु नही

    उसने तो श्वेत रंग को जीवन में उतार दिया है

      वह तो निर्विकारी हो गयी है

योगिनी,तपस्विनी,मनोहारिनी हो गयी है

वह तो अपने आत्म रस में खो गयी है

आत्म रस में खोगयी है,खो गयी है।

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Poet

Dr. Abha Maheshwari

EDUCATION :
ADDRESS :Aligarh, U. P
Poet from Aligarh, UP



Publisher

Om Tripathi

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