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गज़ल 

देखकर आपको हम मनाते रहे, 

रात भर ख्वाब यूं हम सजाते रहे।

तुम खफा हो गए पर वजह ना मिली,

सोचकर यूं तुम्हें दिल जलाते रहे।

हैं सजर झूमते छा गईं बदलियाँ,

ये फिजा देख हम गुनगुनाते रहे।

याद से खुशनुमा ये महकती हवा,   

साथ मिल आज हम भी बहकते रहे।

आपकी छाँव बंधन रही है बहुत, 

तोड़कर कब इसे छटपटाते रहे।

ख्वाहिशें चाह दीदार की रात दिन,

टूटकर याद में “श्री" बिखरते रहे।

       



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Poet

Sarita Shrivastav (Shri) 

EDUCATION :
ADDRESS :Khosla vihar colony Dhoulpur , Rajasthan



Publisher

Om Tripathi

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Shourya Paroha

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