लड़खड़ाते कदमों से चलना सीखती है ये जिंदगी, हजार ठोकरें सहकर, चमकता संघर्ष का मोती। दुनिया है कहती रोड़ा हूँ तेरी राह में, पर बैठा है वो भी उस ईश्वर की पनाह में। उस एक पल के लिए आँखें, ना जाने कितनी रातें जगीं। हजार... ........ . .. ..... . . काँटों से कैसा भय जब महकने की चाह हो, कुछ कर पाने की हसरत ही इस जिंदगी का मुकाम हो। उसकी रंगत को देखने, अनगिनत नजरें उठी। हजार.... .. . . .. ................ Written by Tamanna kashyap, Uttar pradesh, sitapur.
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